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तहसील बेहट, सहारनपुर : अवैध खनन का काला खेल चरम पर! थाना बेहट से महज़ चंद कदमों की दूरी पर Gangarhav River में 24 घंटे निर्बाध चल रहा बालू–रेता का अवैध खनन,

बड़ा सवाल, भू–संरक्षण अधिकारी ने नहीं उठाया फोन, SDM बेहट बोले– मामला संज्ञान में नहीं, पर कार्रवाई का दिया भरोसा

तहसील बेहट, सहारनपुर : अवैध खनन का काला खेल चरम पर! थाना बेहट से महज़ चंद कदमों की दूरी पर Gangarhav River में 24 घंटे निर्बाध चल रहा बालू–रेता का अवैध खनन, ट्रैक्टरों से खुलेआम ढुलाई जारी, शासन के कड़े निर्देशों को ताक़ पर रखकर किसकी सहमति से फल–फूल रहा गोरखधंधा? “एंट्री सिस्टम” लागू होने की चर्चा से उठा मिलीभगत का बड़ा सवाल, भू–संरक्षण अधिकारी ने नहीं उठाया फोन, SDM बेहट बोले– मामला संज्ञान में नहीं, पर कार्रवाई का दिया भरोसा

जनपद सहारनपुर की तहसील बेहट में अवैध खनन का कारोबार अब किसी छिपे अपराध की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम एक संगठित उद्योग की तरह संचालित हो रहा है। थाना बेहट, जो Uttar Pradesh Police की निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत काम करता है, से महज़ थोड़ी दूरी पर स्थित riverbed क्षेत्र में खनन माफिया ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू–रेता का अवैध उत्खनन और परिवहन लगातार 24 घंटे कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, tractor द्वारा नदी के अंदर घुसकर भरे जा रहे बालू–रेता के दृश्य आम हो चुके हैं, जो नियोजन व पर्यावरण कानून के तहत संरक्षित नदी–तल को सीधे नुकसान पहुँचाने वाला गंभीर संज्ञेय अपराध बनता है। शासन द्वारा अवैध खनन पर कठोर प्रतिबंध और स्पष्ट आदेश जारी किए गए, लेकिन धरातल पर इन आदेशों का पालन कहीं दृष्टिगोचर नहीं हो रहा। कस्बा बेहट के निकट floodplain से लगे क्षेत्र में रोज़ भारी मात्रा में बालू निकालने की सूचनाएँ मिल रही हैं। इस कृत्य से न केवल सार्वजनिक–आधारभूत संसाधन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण और पुलिस कर्तव्यों की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लग रहा है। सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि खनन–क्षेत्र में एक “एंट्री सिस्टम” लागू किया गया है, जिसके तहत कथित रूप से अवैध ढुलाई करने वाले प्रत्येक ट्रैक्टर से एक निश्चित राशि लेकर नदी तक पहुँचने की अनुमति दी जा रही है। यह एंट्री किसके द्वारा ली जा रही है? यह राशि कहाँ जा रही है? क्या राजस्व या पुलिस–तंत्र के कोई लोग इस व्यवस्था को मौन समर्थन दे रहे हैं? यह जाँच का बड़ा और अनिवार्य विषय बन चुका है, जिसकी पारदर्शिता और सत्यता के अभाव में अवैध कारोबार को प्रशासनिक संरक्षण मिलने की आशंका और मजबूत होती जा रही है। जब हमने इस मामले में भू–संरक्षण अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया, ताकि धरती और नदी के प्राधिकारिक रक्षक से घटना की तथ्य–पुष्टि हो सके, तो उनका फोन नहीं उठाया गया, जिससे मामले में संदेह और गहराता चला गया। तत्पश्चात, याचिका और शिकायत प्रक्रिया के अंतर्गत हमने Behat SDM कार्यालय के दूरभाष–संपर्क पर बात की। माननीय उपजिलाधिकारी महोदय ने इसे अपने संज्ञान में नहीं होना बताया, परन्तु उन्होंने कानूनसम्मत कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया, जिसमें अवैध खनन पर नियंत्रण, परिवहन पर प्रतिबंध, और दोषी लोगों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्यवाही की बात कही गई। उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा दिया गया आश्वासन स्वागत–योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल आश्वासन पर्याप्त है, जब ज़मीनी स्तर पर खनन 24 घंटे जारी है और हर कोई इसे देख रहा है? शासन के आदेशों पर सख्ती से अमल सुनिश्चित करना प्रशासनिक और पुलिस कर्तव्यों का संयुक्त दायित्व है। यह प्रकरण अब केवल अवैध बालू निकालने का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता, संभावित मिलीभगत, कर्तव्य–भंग और सार्वजनिक संसाधन क्षति का सामूहिक अपराध बन चुका है, जिसे लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश और भय का वातावरण है। यह प्रेस नोट प्रशासन से पुनः मांग करता है कि इस मामले में समयबद्ध, प्रमाण–सहित, तथा कठोरतम कार्रवाई लागू की जाए, ताकि लोकतंत्र और कानून का मान बना रहे तथा बेहट क्षेत्र अपराध मुक्त और पर्यावरण सुरक्षित बने रह सकें।


रिपोर्ट : अलिक सिंह
संपादक – Vande Bharat Live TV News
ब्यूरो प्रमुख – Dainik Aashanka Bulletin
संपर्क : 8217554083

 

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